'गोल' महान भारतीय हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के संस्मरण का एक प्रेरणादायक अंश है। इसमें उन्होंने अपने जीवन की एक वास्तविक घटना के माध्यम से खेल भावना, अनुशासन, धैर्य, टीमवर्क और क्षमाशीलता का संदेश दिया है।
एक हॉकी मैच के दौरान विरोधी खिलाड़ी ने गुस्से में ध्यानचंद के सिर पर हॉकी स्टिक मार दी। ध्यानचंद ने बदला लेने के बजाय शानदार खेल दिखाते हुए लगातार छह गोल किए और बाद में उसी खिलाड़ी को समझाया कि खेल में क्रोध नहीं, बल्कि खेल भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है। आगे वे अपनी सफलता का रहस्य बताते हैं—लगन, नियमित अभ्यास, अनुशासन और टीम के लिए खेलना। वे स्वयं गोल करने की अपेक्षा अपने साथियों को गोल करने का अवसर देते थे। यही निःस्वार्थ खेल भावना उन्हें 'हॉकी का जादूगर' बनाती है।
अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी संस्मरण लेखन, खेल भावना, शब्द-युग्म, भाषा प्रयोग, डायरी लेखन, खेल समाचार तथा भारतीय पारंपरिक खेल डाँडी (गोथा) के बारे में भी सीखते हैं।
Key Points
• पाठ का विषय – खेल भावना, अनुशासन, टीमवर्क और सच्ची खेल संस्कृति।
• मुख्य पात्र – मेजर ध्यानचंद, विश्व प्रसिद्ध भारतीय हॉकी खिलाड़ी।
• बदला लेने का तरीका – ध्यानचंद ने हिंसा से नहीं बल्कि शानदार खेल दिखाकर छह गोल किए।
• खेल भावना – विरोधी खिलाड़ी को क्षमा कर उसे सही खेल भावना का महत्व समझाया।
• सफलता का रहस्य – लगन, अभ्यास, अनुशासन और खेल भावना।
• टीमवर्क – स्वयं गोल करने के बजाय साथियों को गोल करने का अवसर देना।
• राष्ट्रीय गौरव – 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
• 'हॉकी का जादूगर' – असाधारण खेल कौशल के कारण दुनिया ने उन्हें यह सम्मान दिया।
• भाषा अध्ययन – शब्द-युग्म, योजक चिह्न, बल देने वाले शब्द (ही, भी, तो) तथा संस्मरण की विशेषताएँ।
• लेखन कौशल – डायरी लेखन, खेल समाचार और आँखों देखा हाल लिखना।
• स्वदेशी खेल – डाँडी (गोथा) नामक पारंपरिक भील-भिलाला खेल का परिचय।
• जीवन मूल्य – जीत से अधिक महत्वपूर्ण है अच्छा व्यवहार, सहयोग और ईमानदारी।