'हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान' प्रसिद्ध लेखक एवं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखा गया एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें लेखक अपनी केन्या (नैरोबी) और मॉरीशस की यात्रा का वर्णन करते हैं।
यात्रा के दौरान लेखक सबसे पहले नैरोबी के नेशनल पार्क में शेरों, हिरणों, जिराफ़ों तथा अन्य वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखते हैं। इसके बाद वे मॉरीशस पहुँचते हैं, जहाँ भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या, भारतीय संस्कृति, भाषा, धर्म, त्योहार और परंपराओं को देखकर उन्हें ऐसा लगता है मानो वे किसी "छोटे-से हिंदुस्तान" में आ गए हों।
लेखक बताते हैं कि भारतीयों ने अपनी मेहनत, संस्कृति, धार्मिक आस्था और भाषा के माध्यम से मॉरीशस को भारतीय संस्कृति से समृद्ध बनाया है। वहाँ रामचरितमानस का पाठ, शिवालय, शिवरात्रि का उत्सव, भोजपुरी भाषा और भारतीय रीति-रिवाज आज भी जीवित हैं। यह पाठ भारतीय संस्कृति, एकता, परिश्रम, प्रवासी भारतीयों के योगदान तथा सांस्कृतिक गौरव का सुंदर परिचय कराता है।
Key Points
• लेखक – रामधारी सिंह 'दिनकर'।
• विधा – यात्रा-वृत्तांत।
• यात्रा का क्रम – दिल्ली → मुंबई → नैरोबी (केन्या) → मॉरीशस।
• नैरोबी नेशनल पार्क – शेरों, हिरणों और अन्य वन्य जीवों का प्राकृतिक निवास।
• शेरों का व्यवहार – शेर पर्यटकों की ओर ध्यान दिए बिना आराम करते दिखाई देते हैं।
• मॉरीशस का परिचय – हिंद महासागर का सुंदर द्वीप, जिसे "छोटा-सा हिंदुस्तान" कहा गया है।
• भारतीय जनसंख्या – मॉरीशस में बड़ी संख्या भारतीय मूल के लोगों की है।
• भारतीय संस्कृति – मंदिर, रामचरितमानस, शिवरात्रि, भोजपुरी भाषा और भारतीय परंपराएँ आज भी जीवित हैं।
• कृषि एवं उद्योग – गन्ने की खेती और चीनी उद्योग मॉरीशस की अर्थव्यवस्था का आधार हैं।
• भाषाएँ – अंग्रेज़ी, फ्रेंच, क्रेयोल और भोजपुरी का प्रयोग होता है।
• सांस्कृतिक गौरव – भारतीयों ने अपनी संस्कृति को विदेश में भी सुरक्षित रखा।
• मुख्य संदेश – अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करना चाहिए।