'रहीम के दोहे' में महान कवि अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना (रहीम) के सात प्रसिद्ध नीति-दोहे दिए गए हैं। इन दोहों के माध्यम से रहीम जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों जैसे प्रेम, विनम्रता, परोपकार, मधुर वाणी, आत्मसम्मान, सच्ची मित्रता और विश्वास का संदेश देते हैं।
रहीम बताते हैं कि छोटी-से-छोटी वस्तु भी महत्वपूर्ण होती है, सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति दूसरों के हित में लगाते हैं, प्रेम का संबंध कभी नहीं तोड़ना चाहिए, सम्मान बनाए रखना चाहिए और कठिन समय में ही सच्चे मित्रों की पहचान होती है। वे सोच-समझकर बोलने और दूसरों की सहायता करने की सीख भी देते हैं।
इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी दोहों का भावार्थ, शब्दों के अनेक अर्थ, शब्द-संपदा, भाषा-सौंदर्य तथा नैतिक मूल्यों को सीखते हैं।
Key Points
• दोहों का विषय – जीवन-मूल्य, नीति, प्रेम, परोपकार और सदाचार।
• कवि परिचय – रहीम भक्ति काल के प्रसिद्ध नीति-कवि थे।
• छोटी वस्तु का महत्व – सुई का काम तलवार नहीं कर सकती; हर वस्तु उपयोगी होती है।
• परोपकार – पेड़ और सरोवर की तरह सज्जन दूसरों के लिए जीते हैं।
• प्रेम का महत्व – प्रेम का संबंध टूटने पर पहले जैसा नहीं रहता।
• आत्मसम्मान – पानी (सम्मान) बनाए रखना जीवन में आवश्यक है।
• विपत्ति का महत्व – कठिन समय में सच्चे मित्र और शत्रु की पहचान होती है।
• वाणी का प्रभाव – बिना सोचे बोले गए शब्द नुकसान पहुँचा सकते हैं।
• सच्ची मित्रता – विपत्ति में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र होता है।
• भाषा अध्ययन – दोहों का भावार्थ, शब्दों के अनेक अर्थ और शब्द-संपदा।
• साहित्यिक सौंदर्य – सरल भाषा में गहरी जीवन-शिक्षा दी गई है।
• नैतिक शिक्षा – प्रेम, सम्मान, विनम्रता और सद्भाव जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं।