'मेरी माँ' प्रसिद्ध क्रांतिकारी रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा का एक प्रेरणादायक अंश है। इसमें वे अपनी माँ के प्रति गहरा सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। बिस्मिल बताते हैं कि उनकी माँ ने कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें सत्य, साहस, शिक्षा, देशभक्ति और अच्छे संस्कारों का मार्ग दिखाया।
उनकी माँ स्वयं कम पढ़ी-लिखी थीं, फिर भी उन्होंने अपने प्रयासों से शिक्षा प्राप्त की और अपने बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बिस्मिल को सत्य का साथ देने, किसी के प्राण न लेने और देश की सेवा करने की प्रेरणा दी। फाँसी से पहले भी बिस्मिल अपनी माँ के त्याग और संस्कारों को याद करते हुए उन्हें प्रणाम करते हैं।
यह अध्याय मातृ-प्रेम, राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों, आत्मबल और अच्छे संस्कारों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
Key Points
• आत्मकथा का अंश – यह रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा 'निज जीवन की एक छटा' का अंश है।
• माँ का प्रेरणादायक व्यक्तित्व – माँ ने बिस्मिल को सत्य, साहस और देशभक्ति की शिक्षा दी।
• शिक्षा का महत्व – स्वयं शिक्षा प्राप्त कर बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
• सत्यनिष्ठा – बिस्मिल ने झूठे हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
• देशभक्ति – बचपन से ही देश-सेवा और स्वतंत्रता आंदोलन में रुचि थी।
• साहस और दृढ़ निश्चय – कठिन परिस्थितियों में भी अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे।
• माँ के संस्कार – माँ ने प्रेम, धैर्य और सदाचार से उनका व्यक्तित्व बनाया।
• अहिंसा का संदेश – माँ किसी के प्राण लेने के पक्ष में नहीं थीं।
• मातृऋण – बिस्मिल मानते हैं कि वे अपनी माँ का ऋण कभी नहीं चुका सकते।
• राष्ट्र सेवा – भारत माता की सेवा को जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य माना।
• लेखन शैली – आत्मकथात्मक शैली में भावपूर्ण वर्णन किया गया है।
• जीवन-मूल्य – शिक्षा, मातृभक्ति, त्याग, सत्य और राष्ट्रप्रेम का महत्व बताया गया है।