'सत्रिया और बिहू नृत्य' लेखिका जया मेहता द्वारा लिखा गया एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें लंदन की दस वर्षीय बच्ची एंजेला अपने माता-पिता के साथ असम आती है, जहाँ उसकी माँ असम के प्रसिद्ध बिहू और सत्रिया नृत्य पर डॉक्यूमेंट्री बनाने आई हैं।
असम पहुँचकर एंजेला पहली बार बिहू उत्सव, ग्रामीण जीवन, लोक-संगीत, रंग-बिरंगे वस्त्र, पारंपरिक भोजन और लोगों की संस्कृति को करीब से देखती है। बाद में वह माजुली के सत्रों (वैष्णव मठों) में सत्रिया नृत्य की परंपरा को समझती है और अपनी नई मित्र अनु के साथ इस नृत्य की बारीकियाँ सीखती है।
वापस लंदन लौटने के बाद भी एंजेला असम की संस्कृति को नहीं भूलती और अपने विद्यालय में असम के नृत्यों का परिचय देकर भारतीय संस्कृति का प्रसार करती है। यह पाठ भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोककला, मित्रता तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सुंदर संदेश देता है।
Key Points
• पाठ का प्रकार – यात्रा-वृत्तांत एवं सांस्कृतिक परिचय।
• मुख्य पात्र – एंजेला, उसकी माँ एलेसेंड्रा, पिता ब्रायन, अनु और रीना सेन।
• स्थान – असम (गुवाहाटी, माजुली तथा सत्र)।
• बिहू उत्सव – असम का प्रमुख कृषि-आधारित त्योहार, जिसे वर्ष में तीन बार मनाया जाता है।
• सत्रिया नृत्य – असम का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य, जिसकी उत्पत्ति वैष्णव सत्रों में हुई।
• बिहू नृत्य – बसंत, नई फसल और नए वर्ष की खुशी का लोकनृत्य।
• सांस्कृतिक विविधता – भारत की भाषा, वेशभूषा, संगीत, भोजन और नृत्य की विविधता का परिचय।
• मित्रता – एंजेला और अनु की मित्रता अलग-अलग देशों की संस्कृति को जोड़ती है।
• महिलाओं की भागीदारी – आधुनिक समय में महिलाएँ भी सत्रिया नृत्य की प्रमुख कलाकार हैं।
• सांस्कृतिक सम्मान – एंजेला लंदन लौटकर भी असम की संस्कृति को याद रखती है और दूसरों से परिचित कराती है।
• यात्रा का महत्व – नई जगहों की यात्रा से ज्ञान, अनुभव और सांस्कृतिक समझ बढ़ती है।
• भारत की विशेषता – विविधता में एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत।