'जलाते चलो' प्रसिद्ध कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की एक प्रेरणादायक कविता है। यह कविता हमें जीवन में कभी हार न मानने, कठिन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करने और प्रेम, आशा तथा मानवता का दीपक जलाए रखने का संदेश देती है।
कवि दीपक को आशा, प्रेम, ज्ञान और अच्छे कर्मों का प्रतीक मानते हैं तथा अँधेरे को अज्ञान, निराशा, अन्याय और बुराइयों का प्रतीक बताते हैं। वे कहते हैं कि यदि संसार में प्रेम और सद्भाव के दीप जलते रहेंगे, तो एक दिन अँधेरा अवश्य दूर होगा। चाहे आँधियाँ और तूफ़ान कितने भी आएँ, हमें अपने लक्ष्य और मानवता की सेवा से पीछे नहीं हटना चाहिए।
इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी कविता के भाव, प्रतीकों, शब्दार्थ, भाषा-सौंदर्य तथा अमावस्या–पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष जैसी रोचक जानकारियों को भी सीखते हैं।
Key Points
• कविता का विषय – प्रेम, आशा, साहस और मानवता का संदेश देना।
• दीपक का प्रतीक – दीपक ज्ञान, प्रेम, आशा और सद्कर्म का प्रतीक है।
• अँधेरे का प्रतीक – अँधेरा अज्ञान, निराशा, अन्याय और बुराइयों का प्रतीक है।
• निरंतर प्रयास – कठिनाइयों के बावजूद अच्छे कार्य करते रहने की प्रेरणा दी गई है।
• तूफ़ान का अर्थ – जीवन की चुनौतियाँ और बाधाएँ।
• आशावाद – एक छोटा-सा दीप भी पूरे अँधेरे को मिटाने की शुरुआत कर सकता है।
• मानवता का संदेश – अपने साथ-साथ पूरे विश्व के कल्याण की भावना रखनी चाहिए।
• प्रतीकात्मक भाषा – दीप, तिमिर, नाव, सवेरा, निशा आदि का प्रतीकात्मक प्रयोग किया गया है।
• काव्य-सौंदर्य – सरल भाषा, लय, तुकांत और प्रेरणादायक भावों का सुंदर मेल है।
• खगोलीय ज्ञान – अमावस्या, पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की जानकारी दी गई है।
• भाषा-अध्ययन – समानार्थी शब्द, प्रतीक, 'सा/सी/से' का प्रयोग तथा शब्दों के रूप सीखने को मिलते हैं।
• जीवन-मूल्य – प्रेम, सेवा, धैर्य, सकारात्मक सोच और निरंतर कर्म का महत्व बताया गया है।
👉 👉जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, हमें आशा, प्रेम और सद्कर्म का दीपक कभी नहीं बुझने देना चाहिए। छोटे-से अच्छे कार्य भी समाज और संसार में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास से अँधेरा अवश्य दूर होता है।